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मेरठ के 16726 निर्माणों को तत्काल सील करने के आदेश, सुप्रीम कोर्ट का मेरठ सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण केस में सख्त रुख

मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ के सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण मामले में सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा कि अवैध निर्माण अवैध ही होता है। उसके खिलाफ एक्शन होता है, चाहे वह एक्शन 5 साल बाद हो, या 50 साल बाद। दरअसल, सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण मामले में लोगों को राहत दिए जाने की मांग लगातार उठ रही है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अवैध निर्माणों को हर हाल में तोड़ा जाएगा। कोर्ट ने सेंट्रल मार्केट की सुनवाई के दौरान सेट बैक वाली प्रॉपर्टी के अवैध निर्माण के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। उन सभी ढांचे को गिराने का आदेश दिया। उल्देपुर में अवैध निर्माण का मामला सामने आने के बाद कोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने कहा कि तोड़ना तो पड़ेगा ही। 500 से 600 अवैध कॉलोनियों का निर्माण हो गया। प्राधिकरण से कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की स्थिति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जोन एक के निर्माण होंगे सील

सुप्रीम कोर्ट ने जोन-1 के 16,726 निर्माण को तत्काल सील करने के आदेश दिए हैं। उल्देपुर की अवैध कॉलोनियों पर भी सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट तौर पर कहा कि अवैध कॉलोनी में किए गए निर्माण को हर हाल में ढहाया जाएगा। सील के बावजूद बची इमारत पर भी कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं। कोर्ट ने 44 संपत्तियों के आदेश में कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के क्रम में कहा कि अब तक आवास विकास में केवल कुछ संपत्तियों पर ही कार्रवाई की गई है।

इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने प्रमुख सचिव आवास से जवाब मांगा है। कोर्ट ने आवास विकास के प्रमुख सचिव से सवाल किया है कि अवैध निर्माण कैसे हुए? इसके बारे में पूरी जानकारी दी जाए। अगली सुनवाई के लिए 9 दिसंबर की तारीख तय की गई है।

अवैध कॉलोनियों पर आश्चर्य

सुप्रीम कोर्ट के वकील ईलिन सारस्वत ने कोर्ट की सुनवाई के संबंध में बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अथॉरिटी के अधिकारियों को सुनाते हुए कहा कि अवैध निर्माण अवैध ही होता है और उसके खिलाफ कार्रवाई की ही जाती है, चाहे पांच वर्षों बाद हो या पचास वर्षों बाद हो। उल्देपुर में सैकड़ों अवैध कॉलोनियों की बात पर गहरा आश्चर्य जताते हुए कोर्ट ने सभी अवैध कॉलोनी को गिराने का आदेश दिया। साथ ही, अथॉरिटी पर कड़ा रुख भी अपनाया है।

कोर्ट ने पूछा कि जब पिछले पांच वर्षों से अवैध कॉलोनी निर्माण सड़कों का निर्माण हो रहा था। उस समय परिषद और अफसर क्या कर रहे थे? इस दौरान कोई सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई? इन सबका मास्टरमाइंड कौन है? इनका उत्तर अथॉरिटी की ओर से नहीं दिया गया। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अथॉरिटी के चेयरमैन गुरुप्रसाद को मेरठ शहर के चारों जोन ए, बी, सी और डी में स्थित सारे अवैध निर्माण और उन पर एक्शन को लेकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

सीलिंग को लेकर सख्त आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने अवैध निर्माण पर सख्ती दिखाते हुए सरकार को आदेश दिया कि मेरठ शहर के ए जोन स्थित लगभग 16,726 अवैध निर्माणों के खिलाफ तुरंत एक्शन लिया जाए। इसकी शुरुआत उक्त निर्माणों की सीलिंग से हो। कोर्ट ने हाल ही में हुए दिल्ली के हादसे का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे निर्माणों का हटाया जाना अति आवश्यक है।

सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल मार्किट इत्यादि में विस्थापित और प्रभावित हुए लोगों के पुनर्वास की कार्यवाही को सरकार पर छोड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार इनको पुनर्वासित करने के लिए आजाद है। सरकार चाहे तो प्रभावित लोगों का पुनर्वास कर सकती है। कोर्ट ने पिटीशन को जान की धमकी मिलने के मामले में सरकार को सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

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