सुलतानपुर में गैंगस्टर राजेश शुक्ला को गैंगस्टर एक्ट के एक मामले में विशेष न्यायाधीश राकेश यादव ने चार वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि जुर्माना जमा नहीं करने पर दोषी को एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
जेल से गवाह को धमकी देने का था आरोप
यह मामला गैंगस्टर एक्ट के तहत जेल में रहते हुए मुकदमे की पैरवी न करने की धमकी देने से जुड़ा है। न्यायालय में राजेश शुक्ला ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए दंडित किए जाने की प्रार्थना की, जिसके आधार पर अदालत ने फैसला सुनाया। बताया गया कि वह इस मामले में पहले ही करीब पांच वर्ष जेल में बिता चुका है।
वर्ष 2002 में दर्ज हुई थी एफआईआर
विशेष लोक अभियोजक अलका सिंह के अनुसार, इस मामले की एफआईआर 6 जनवरी 2002 को करौदीकला थाने में तारकेश्वर सिंह निवासी गोवा पट्टी बांगरकला की तहरीर पर दर्ज हुई थी।
शिकायत के अनुसार, 8 अक्टूबर 2000 की सुबह करीब 9:30 बजे परशुराम विद्यालय परिसर में शहाबुद्दीनपुर निवासी जयहिंद सिंह, बबलू सिंह और शुकुलपुर निवासी राजेश शुक्ला ने जानलेवा हमला किया था।
पैरवी छोड़ने की दी थी धमकी
घटना के बाद तीनों आरोपी जेल भेजे गए थे। बाद में जयहिंद सिंह और बबलू सिंह जमानत पर रिहा हो गए। आरोप है कि 5 अक्टूबर को दोनों ने वादी तारकेश्वर सिंह से मिलकर कहा कि राजेश शुक्ला ने जेल से संदेश भेजा है कि मुकदमे की पैरवी छोड़ दें, अन्यथा उन्हें जान से मार दिया जाएगा।
दो आरोपियों की हो चुकी है मौत
मामले की विवेचना एबी सिंह ने की और तीनों आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। विचारण के दौरान सह-आरोपी जयहिंद सिंह और बबलू सिंह की मृत्यु हो गई। इसके बाद राजेश शुक्ला ने अदालत में अपना जुर्म स्वीकार कर लिया, जिसके आधार पर विशेष अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए चार वर्ष की सजा सुनाई।

