मेरठ के भावनपुर थाना क्षेत्र में भारतीय किसान यूनियन (बी.आर. अंबेडकर) ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन का दावा है कि न्याय मांगने पर पुलिस ने एक व्यक्ति पर फर्जी मुकदमा दर्ज किया है और आंदोलन की चेतावनी दी है।
संगठन के अनुसार, 11 जून को खनन माफियाओं ने मोहित जाटव पर जानलेवा हमला किया था। इस मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपियों से समझौता करने का दबाव बनाया गया।
भाकियू बीआर अंबेडकर का आरोप है कि समझौते से इनकार करने पर पुलिस ने 14 जुलाई की रात की कथित घटना के आधार पर 15 जुलाई को मोहित समेत अन्य लोगों के खिलाफ मारपीट और रंगदारी का मुकदमा दर्ज कर दिया।
संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने हिरासत के दौरान मोहित के साथ मारपीट और अभद्रता की। बाद में मोहित का नाम स्थायी हिस्ट्रीशीटर की सूची में शामिल कर दिया गया। संगठन ने इसे पुलिस की मनमानी बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
भाकियू बीआर अंबेडकर ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन हाईकोर्ट प्रयागराज का रुख करेगा। साथ ही, मेरठ जिलाधिकारी कार्यालय पर जल्द ही विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित करने की बात कही गई है। संगठन ने कहा है कि न्याय की लड़ाई जारी रहेगी और किसी भी आंदोलन की जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की होगी।
वहीं, थाना प्रभारी भावनपुर जोगिंदर सिंह ने संगठन द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि पुलिस कप्तान अविनाश पांडे के निर्देश पर भावनपुर थाना क्षेत्र में अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए तीन लोगों को स्थायी हिस्ट्रीशीटर घोषित किया गया है।
यह कार्रवाई पुलिस अभिलेखों और संबंधित व्यक्तियों के पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड के आधार पर की गई है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, स्थायी हिस्ट्रीशीटर घोषित किए गए लोगों में ताहिर उर्फ पप्पू पुत्र जान मोहम्मद, निवासी ग्राम नगला साहू, थाना भावनपुर (उम्र करीब 48 वर्ष, हिस्ट्रीशीट नंबर 189-A), और मोहित पुत्र स्वर्गीय सुरेश सिंह, निवासी ग्राम किनानगर, थाना भावनपुर, मेरठ (हिस्ट्रीशीट नंबर 187-A) शामिल हैं।
वहीं तीसरे व्यक्ति लोकेश पुत्र सूरजमल, निवासी ग्राम शाह कुलीपुर, जनपद मेरठ, उम्र करीब 39 वर्ष, का हिस्ट्रीशीट नंबर 188-A दर्ज है। पुलिस के मुताबिक, स्थायी हिस्ट्रीशीटर घोषित किए जाने के बाद संबंधित व्यक्तियों की गतिविधियों पर नियमानुसार निगरानी रखी जाएगी।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए आगे भी नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी। फिलहाल, एक ओर भाकियू बीआर अंबेडकर पुलिस कार्रवाई को उत्पीड़न और फर्जी मुकदमे से जोड़ते हुए आंदोलन की चेतावनी दे रही है, वहीं पुलिस इन आरोपों को खारिज कर कार्रवाई को रिकॉर्ड और नियमानुसार की गई कार्रवाई बता रही है। ऐसे में मामले को लेकर दोनों पक्षों के दावों के बीच निष्पक्ष जांच और संबंधित अभिलेखों की स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है।

