सुल्तानपुर में 34 साल पुराने रेलवे फाटक क्षतिग्रस्त करने के मामले में सोमवार 28 सितंबर को ACJM-III शुभम वर्मा की अदालत ने फैसला सुनाया। आरोपी ट्रक चालक प्रदीप त्यागी ने अदालत में स्वेच्छा से अपना अपराध स्वीकार कर लिया। इसके बाद कोर्ट ने उसे न्यायालय उठने तक की कैद और कुल 3,500 रुपए के अर्थदंड से दंडित किया।
मामला वर्ष 1992 का है। लखनऊ-वाराणसी रेलखंड पर पखरौली स्टेशन के सहायक स्टेशन मास्टर बीके भटनागर ने 27 अक्टूबर 1992 की रात करीब 12 बजे जीआरपी सुल्तानपुर चौकी में एफआईआर दर्ज कराई थी। एफआईआर के मुताबिक, स्टेशन से पहले स्थित रेलवे फाटक को यूएचएन 845 और यूएचएन 3167 के चालक ने तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाते हुए जोरदार टक्कर मार दी थी। इससे रेलवे फाटक क्षतिग्रस्त हो गया था।
विवेचना में ट्रक चालक की भूमिका सामने आई
मामले में मेरठ के नौचंदी थाना क्षेत्र स्थित फूलबाग कॉलोनी निवासी प्रदीप त्यागी पुत्र जगन नाथ त्यागी के खिलाफ जीआरपी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। तत्कालीन दरोगा बीआर सोनकर ने मामले की विवेचना की। विवेचना के बाद प्रदीप त्यागी द्वारा घटना कारित किए जाने की बात सामने आने पर उनके खिलाफ एमवी एक्ट और रेलवे एक्ट के तहत आरोप पत्र न्यायालय भेजा गया था।
अपराध स्वीकार करने पर कोर्ट ने सुनाई सजा
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने 28 सितंबर को निर्णय पारित किया। अभियुक्त प्रदीप त्यागी ने अदालत में स्वेच्छा से अपना अपराध स्वीकार कर लिया। इसके आधार पर कोर्ट ने उसे धारा 279, 427 आईपीसी, धारा 160 रेलवे एक्ट तथा धारा 184, 134 और 177 एमवी एक्ट के तहत दोषी ठहराया।
अदालत ने आईपीसी की धारा 279, 427 और रेलवे एक्ट की धारा 160 के तहत 1,500 रुपए तथा एमवी एक्ट की धाराओं 184, 134 और 177 के तहत 2,000 रुपए का अर्थदंड लगाया। कुल 3,500 रुपए जुर्माना जमा करना होगा। निर्धारित समय में अर्थदंड जमा नहीं करने पर आरोपी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

