REPORT BY: ARUN MISHRA
SZN संवाददाता, मेरठ। मुख्य सचिव एसपी गोयल कमिश्नरी में बैठक के बाद अचानक कचहरी परिसर स्थित विकास भवन में पहुंच गए। वहां पहुंचकर सीडीओ के चेंबर में लगभग आधा घंटा उन्होंने गुजारा। इस दौरान उन्होंने अपने 33 साल पुरानी इस कार्यालय की यादें ताजा कीं और बोले की यह कार्यालय तो 33 साल बाद भी वैसा का वैसा ही है, बिल्कुल नहीं बदला।
मुख्य सचिव एसपी गोयल वर्ष 1993 में एक साल से ज्यादा समय तक मेरठ में सीडीओ के पद पर तैनात थे। सोमवार को कांवड़ यात्रा की तैयारी को लेकर बैठक करने के लिए मेरठ पहुंचे तो उन्हें अपने पुराने कार्यालय की याद आ गई। उन्होंने गोपनीय रूप से जिला प्रशासन के अधिकारियों को संदेश भिजवाया कि वह अपना पुराना कार्यालय देखना चाहते हैं। इसके बाद अधिकारियों ने इसकी व्यवस्था की।
बैठक के बाद उन्होंने सर्किट हाउस में लंच किया और उसके बाद विकास भवन पहुंच गए। इस दौरान उनके साथ कमिश्नर भानु चंद्र गोस्वामी जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह व सीडीओ नूपुर गोयल भी थे। मुख्य सचिव ने जैसे ही विकास भवन की सीढ़ियां चढनी शुरू की वैसे ही अपनी पुरानी यादें ताजा करनी शुरू कर दीं। उन्होंने अधिकारियों से बताया कि उनके मेरठ में तैनाती से एक साल पहले वर्ष 1992 में यह नया भवन बनकर तैयार हुआ था।
सीडीओ के चेंबर में पहुंचे तो वहां का उस समय का नक्शा उन्होंने अधिकारियों को बताया। कैसे और कहां बैठते थे, कितने लोग आते थे। अपनी तैनाती के दौरान के किस्से भी उन्होंने अधिकारियों को सुनाए।
सीडीओ नूपुर गोयल को उन्होंने उनकी सीट पर बैठाकर आशीर्वाद दिया। कहा कि ‘आप हमारी बिटिया के समान हैं। इस सीट पर बैठकर ऐसा काम करना की जनता आपको याद करे।’ इस दौरान लगभग आधा घंटा से ज्यादा समय तक मुख्य सचिव विकास भवन में रहे डीएम और सीडीओ ने उन्हे स्मृति चिन्ह के रूप में मेरठ का बिगुल और क्रिकेट की गेंद और बल्ले का प्रतीक चिह्न प्रदान किया।

