REPORT BY: ARUN MISHRA
मेरठ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 17 और 18 जुलाई को पश्चिम उत्तर प्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे छह जिलों का दौरा करके विकास परियोजनाओं की प्रगति, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा करेंगे। मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम को देखते हुए मेरठ जोन एडीजी (ADG) ने संबंधित जिलों शामली और बुलंदशहर में पुलिस प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा है। शासन स्तर से सुरक्षा, प्रोटोकॉल और तैयारियों को लेकर अधिकारियों को विशेष निर्देश जारी किए गए हैं।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री 17 जुलाई को गाजियाबाद, शामली और बिजनौर जाएंगे। इसके बाद 18 जुलाई को अमरोहा, बुलंदशहर और संभल का दौरा करेंगे। प्रत्येक जिले में समीक्षा बैठकों के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन से विकास कार्यों की प्रगति रिपोर्ट ली जाएगी। मुख्यमंत्री विभिन्न विभागों की योजनाओं की जमीनी स्थिति का भी आकलन करेंगे और आवश्यक दिशा निर्देश देंगे।
शामली को 617.70 करोड़ की विकास परियोजनाएं
शामली और बिजनौर के दौरे को विशेष महत्व दिया जा रहा है। शामली के कैराना में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री जनसभा को संबोधित करेंगे। इसके साथ जिले को करीब 617.70 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात देने की तैयारी है। विजय सिंह पथिक राजकीय महाविद्यालय परिसर में होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। बिजनौर में भी विभिन्न विकास कार्यों की समीक्षा और योजनाओं से जुड़े कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
की कानून-व्यवस्था पर सख्त कार्यशैली को देखते हुए सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि दौरे के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो।
मेरठ में प्रशासनिक गतिविधियां
इधर, कांवड़ यात्रा की तैयारियों के बीच 18 जुलाई को मेरठ में भी महत्वपूर्ण प्रशासनिक गतिविधियां होने की संभावना है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण, प्रमुख सचिव सहित वरिष्ठ अधिकारी मेरठ पहुंच सकते हैं। यहां कांवड़ यात्रा को लेकर अंतरराज्यीय समन्वय बैठक आयोजित होने की संभावना है, जिसमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली और राजस्थान के अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक प्रबंधन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और विभिन्न राज्यों के बीच समन्वय को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार की जाएगी। इसके बाद इसी सिलसिले में अगली बैठकें दिल्ली, गाजियाबाद और उत्तराखंड में आयोजित की जाएंगी।

